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मेरा मन | Hindi poetry

नमस्कार साथियों ,

कविता लेखन मन के उदगारों को अभिव्यक्त करने का एक सशक्त माध्यम है क्योंकि इसमें हम अपने मन में तरंगित विचारों को शब्दों के हार में पिरोते हैं।

हमारे मन के विचार शब्दों का रूप धारण कर कविता के रूप में प्रगट होतें है।

मेरी यह कविता मन पर आधारित है। हमारा मन बहुत ही चंचल होता है।

इस कविता में उसी चंचलता को प्रकृति के विभिन्न स्वरूपों के साथ तुलना की गई है|

कहते हैं न कि ” मन के हारे हार है और मन के जीते जीत ” तो यदि मन लक्ष्य प्राप्ति के लिए अग्रसर है तो जरूर सफलता मिलेगी।

यह जीवन मे सफलता प्राप्त करने का प्रथम सोपान है।

                       मेरा मन …

 

चन्द्रमा की अप्रतिम छटा से

आलोकित गगन में

विचरण करता

और कभी

तारों की भाँति

टूट जाता

मेरा मन…।

सूरज की प्रथम किरणों से

फूलों की तरह

खिल उठता

और कभी

प्रकृति की विषम बाधाओं से

जूझकर

मुरझा जाता

मेरा मन …

समंदर की असीम

गहराईयां नापता

और कभी

उन्हीं गहराईयों में

खो जाता

मेरा मन…।

सावन की घटा को देख

मयूर सा

नाच उठता

और कभी

थक कर

चूर चूर हो जाता

मेरा मन…।

नदियों के धारा के सदृश

बहा करता

और कभी

अपने ही किनारों से

टकराकर

वापस आता

मेरा मन…।

ऊँचे आसमानों में

पंछी सा उड़ता

और कभी

उंचाईयों को देख

स्वाभिमान से

भर जाता

मेरा मन…।

जीवन की झंझावातों में

मकड़ियों सा जाल बुनता

और कभी

अपने ही द्वन्द्व में

फंसकर रह जाता

मेरा मन…।

जीवन के संघर्षों को देख

बर्फ सा

जम जाता

और कभी

भावनाओं में बहकर

पिघल जाता

मेरा मन…

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