Motivational

How to achieve success in life| जीवन में सफलता कैसे प्राप्त करें

*जीवन (Life) में कौन सफल (Successful) होना नहीं चाहता ?

*क्या सफलता (Success) यूँ ही मिल जाती है ?

*सफलता ( Success) क्या किस्मत (Luck) पर भी निर्भर करती है ?

*सफल व्यक्ति (Achiever) की क्या विशेषता होती है ?

*सफलता कैसे प्राप्त कर सकते है?

-: सर्व प्रथम आत्मचिंतन :-

यह सब प्रश्न हर किसी के मन मस्तिष्क में विराजमान है। हर कोई अपनी असफलता को लेकर चिंतित है ।

इन सभी प्रश्नो के जवाब क्या हर कोई दे सकता है? नही न ।

लेकिन इन प्रश्नों के जवाब हर किसी के पास मौजूद है।

जरूरत है सिर्फ अपने आत्मचिंतन(Self observation) की अर्थात अपने आप को पहचानने की।

आत्मचिंतन (Self observation) खुद के द्वारा ही किया जा सकता है इससे हम अपने गुण-अवगुण का पता लगा सकते हैं।

यदि मैं स्वयं से प्रश्न करूँ की “मैं कौन हूं?” क्या मुझमें वह इच्छाशक्ति (Will power) है ? क्या मैं अपने आत्मविश्वास (Self confidence) पूर्ण हूँ ? तो इसका जवाब मैं ही दे सकता हूँ |

कहने का का तात्पर्य यह है कि हमें स्वयं को पहचानना है। हमें अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानना है कि मैं क्या -क्या कर सकता हूँ ?

सफलता प्राप्ति के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति (Will power) व आत्मविश्वास (Self confidence) का होना जरूरी है।

स्वामी विवेकानंद जी सारे समुद्र का पानी पी लेने की इच्छाशक्ति रखते थे।

वे आत्मविश्वास से परिपूर्ण थे।तभी वे ज्ञान प्राप्ति की दिशा में अमरत्व (Immortal) हो गए।

हमें कुछ ऐसे ही इच्छाशक्ति व आत्मविश्वास की आवश्यकता होगी।

स्वयं पर अधिक ध्यान केंद्रित करनी पड़ेगी।अपने गुणो -अवगुणों की एक लिस्ट तैयार करनी होगी।

जीवन में कौन सफल होना नहीं चाहता ?

सफ़ल शब्द सुनते ही मन में एक शांति का भाव आ जाता है । मन को सुकून मिलता है और मन प्रफुल्लित हो उठता है |

इस क्षण को पाने हर कोई आतुर हैं चाहे वह किसी भी पेशे का क्यों न हो।

आज हर वर्ग अपनी सफलता के लिए चिंतित है।

क्या सफलता यूँ ही मिल जाती है ?

शांतियुक्त चेहरे के पीछे छुपी सफल व्यक्ति की लगन, परिश्रम ,त्याग और कर्मठता को पहचान नही पाते हैं ।

उनकी इस सफलता के पीछे त्याग की एक लंबी कहानी हो सकती है।

सफल होने से पहले वह भी एक आम आदमी रहा होगा तथा वह भी हमारी तरह एक संघर्षरत रहा होगा।

हर धनी व्यक्ति सफल नही हो सकता और हर सफल व्यक्ति धनी हो यह जरूरी नही ।सफल और धनी होना दोनों पर्याय नही है।सफलता मतलब धन कमाना ही पर्याप्त नही होता ।

उसके साथ- साथ सामाजिक प्रतिष्ठा ,मान -सम्मान , प्रसिद्धि प्राप्त करना भी होता है। धन कमाने के रास्ते तो बहुत है परंतु प्रसिद्धि प्राप्ति के रास्ते कम तो हैं ही कठिन भी हैं|

सफलता क्या किस्मत पर भी निर्भर करती है ?

अधिकतर हम सोचते हैं कि हमारा किस्मत ही साथ नही दे रहा तो सफल कैसे होंगें? परन्तु यह धारना ही सरासर गलत है।

किस्मत से आदमी धनी हो सकता है लेकिन सफल नही बन सकता ।

सफल व्यक्ति की क्या विशेषता होती है ?

कोई भी सफल व्यक्ति अपने विशेष हुनर के कारण सफल होता है उन्होंने अपने इस गुण को पहचाना और उसको तराशते गया ।

अपने कौशल के विकास के लिए तमाम तरह के जतन किये। तभी वह उस मुक़ाम तक पहुचने में कामयाब हो सका।

सफलता कैसे प्राप्त कर सकते हैं ?

क्या हम भी सफल व्यक्ति बन सकते हैं ?

यह प्रश्न हमें स्वयं से करनी चाहिए। यदि इसका उत्तर हाँ है तो हम सफलता प्राप्ति के प्रथम सोपान में है।

हमें अपनी सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना होगा।

कुछ बातें जो हमें सफल व्यक्ति बनाने में मददगार हो सकती हैं वो इस प्रकार हैं-

-: आत्म -विश्लेषण :-

हमें अपनी आंतरिक शक्तियों का पता लगाना है। ईश्वर ने सभी को कुछ न कुछ विलक्षण शक्तियों से नवाज़ा है।

हमें अपनी शक्तियों का अहसास नही होता परन्तु किसी दूसरे की नज़र में हमारे वह गुण जल्दी परिलक्षित होता है।

हमारे उसी गुण को लेकर ही आगे बढ़ना है। उसके विकास के लिए कुछ नयापन सृजन करना हैं।

-: नकल न करें :-

किसी की नकल किया हुआ गुण या हुनर ज्यादा देर तक टिकता नहीं है क्योंकि उसका रंग कुछ ही देर में फीका पड़ जाता है।

कहतें है न कि यदि कैनवास में काला रंग चढ़ा हो तो अन्य रंग नही चढ़ता ।

उसी प्रकार हमारें मन की कालिमा को दूर करते हुए मानवीय गुणों का अधिक से अधिक परिमार्जन (Refinement) करना चाहिये।

वर्तमान परिवेश नवाचार के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है।

(शुध्द मन ,शुद्ध हृदय में ही नवीन सृजन का वास होता है।)

-: समय प्रबंधन :-

प्रकृति में मात्र ऐसा चीज़ जिसका पुनरावर्तन (recycle) नहीं होता वह है_ समय।

इसलिए हर क्षण का सदुपयोग करेंगे तो भविष्य में पछतावे से दूर रहेंगे।

वर्तमान में समय की समस्या सबसे बड़ी समस्या बनती जा रही है।

किसी कार्य के निष्पादन के लिए समय प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है।

-: लक्ष्य निर्धारण :-

सर्वप्रथम लक्ष्य का निर्धारण बहुत सोच समझ कर करना चाहिए क्योंकि उसका पता न हो तो हर कदम पर कांटें चुभेंगे।

अपने रूचि , हुनर , को दृष्टिगत रखते हुए लक्ष्य का निर्धारण करना फायदेमंद रहता है।

मेरी रूचि यदि संगीत में है तो मुझे उसी फिल्ड में अपने कौशलों का विकास करने पर आशातीत सफलता मिल सकती है।

इसके विपरीत यदि मैं पेंटिंग के क्षेत्र में जाऊँ तो मुझे मेहनत तो अधिक करनी पड़ेगी साथ ही साथ उसमें महारथ हासिल करने के लिए विशेष ट्रेनिंग की भी आवश्यकता हो।

-:कार्य- योजना :-

किसी भी लक्ष्य के लिए कार्य योजना उसकी रीड की हड्डी होती है। मतलब लक्ष्य प्राप्ति का सारा दारोमदार उसके कार्य- योजना पर निर्भर करता है।

बिना कार्य योजना के मेहनत करना अँधेरे में तीर चलाने जैसा होता है। एक स्पष्ट रणनीति का होना बहुत जरुरी होता है।

-;सकारात्मक सोच:-

किसी कार्य की पूर्णता पर संदेह करना लक्ष्य पूर्ति में बाधा उत्पन्न करना है। अपनी सोच को हमेशा सकारात्मक रखने से आत्मविश्वास खोने का भय नही रहता है।

गीता में कहा गया है – कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन ।

अर्थात कर्म करते जाओ फल की इच्छा मत करो ।

-: कार्य के प्रति जुनून :-

समर्पित भाव से किए कार्य का फल सदा सार्थक होता है। अपने कार्य के प्रति जूनून होना चाहिये। मन में सदा भाव रखें कि असम्भव नाम की कोई चीज़ ही नही है।

-: परिस्थितियों का सामना:-

क्रिकेट में धोनी द्वारा विपरीत परिस्थितियों में जब वह अपने ग्लोब्स निकाल कर हाथ को जमीन में रगड़ कर अगले गेंद के लिये तैयार होता है तो यह उसके जुनूनी प्रकृति को दर्शाता है।

इस प्रकार के उदाहरण से हमें भी विपरीत परिस्थितियों का सामना करने का बल मिलता है।

-;एकाग्रता:-

एकाग्र चित से किया गया कार्य निपुणता दर्शाता है। मन को सदा संयमित रख कर अपने कार्य में लग जाना एकाग्रता कहलाता है।

संसार के सारे उलझनों को दरकिनार कर कार्य में लग जाना एकाग्रता है।

-:प्रकृति का आकर्षण:-

सारा ब्रह्मांड आकर्षक के क्षेत्र से बंधा हुआ है। चुम्बकीय कंपास सदा उत्तर दिशा को दर्शाता है ।पृथ्वी स्वयं एक चुम्बक की तरह कार्य करती है।

उसी प्रकार हमारे कर्म एवं सोच भी इस आकर्षण से बंधा हुआ है। अच्छे कर्म का परिणाम सदा अच्छा होता है बुरे का बुरा ।

किसी कार्य के लिए समर्पित कर्म एवं सोच की पूर्णता इस प्रकृति के आकर्षण पर निर्भर है।

हमारी जैसी सोच होती जाएगी प्रकृति भी हमारी उस सोच को साकार प्रदान करने में लग जायेगी।

उपसंहार :-

एक सामान्य आदमी भी अपनी योग्यता से वह सफलता हासिल कर सकता जिसका वह हकदार है।

लगन ,परिश्रम एवं तल्लीनता से किये गए कार्य का परिणाम सार्थक होता है।

मनुष्य अपनी मानसिक शक्तियों के बल पर इस प्रकृति पर विजय हासिल किये हुए हैं।

जब मानसिक रूप से सशक्त व्यक्ति किसी कार्य को हाथ लगाता है तो असम्भव सी लगने वाली चीज़ भी बौना नज़र आने लगती है।

थोड़ी सी परिश्रम ,

थोड़ा सा संयम ,

तू अपना जीवन ,

सफल कर ले।

लिख दे इबारत ,

अपने नाम की

इस दुनिया में ,

तू अपना जीवन ,

सफल कर ले।

तम को हर ,

प्रकाश को तू

अपने नाम कर ले।

इस दुनिया में आ के

अपना जीवन

सफल कर ले।

………………..Dev

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